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सरस्वती चालीसा (Saraswati Chalisa): ज्ञान, कला, संगीत, विद्या, और बुद्धि की आराधना

Saraswati Chalisa

Maa Saraswati Chalisa

Introduction

भारतीय संस्कृति में मां सरस्वती को ज्ञान, कला, संगीत, विद्या, और बुद्धि की देवी माना जाता है। सरस्वती पूजा के माध्यम से उनकी कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है सरस्वती चालीसा, जो उनकी महिमा का गान करती है और भक्तों को उनकी कृपा से आशीर्वाद देती है।

यह ब्लॉग पोस्ट सरस्वती चालीसा (Saraswati Chalisa) के महत्व और फायदों पर ध्यान केंद्रित करता है। हम इस चालीसा के माध्यम से कैसे मां सरस्वती की पूजा और आराधना कर सकते हैं और उनसे ज्ञान, बुद्धि, और समृद्धि की प्राप्ति कैसे कर सकते हैं, इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

हम सरस्वती चालीसा (Saraswati Chalisa) के प्रत्येक श्लोक की व्याख्या करेंगे, उसके पीछे संकेत और रहस्य को समझेंगे और इसे प्रतिदिनी जीवन में शामिल करने के लाभ पर चर्चा करेंगे। सरस्वती चालीसा के पाठ करने के द्वारा हम कैसे अपने मन को शुद्ध कर सकते हैं, जीवन में एकाग्रता और समर्पण कैसे विकसित कर सकते हैं और अपनी बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि कैसे कर सकते हैं, इसे विस्तृत रूप से समझाएँगे।

आइए, हम सरस्वती चालीसा (Saraswati Chalisa) के द्वारा अपने आंतरिक ज्ञान, कला, और समृद्धि के स्रोत को प्रकट करें और मां सरस्वती के आशीर्वाद से जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता की प्राप्ति करें।

Saraswati Chalisa lyrics || Saraswati Chalisa lyrics in hindi

॥दोहा॥

जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि।
बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥
पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु।
दुष्जनों के पाप को, मातु तु ही अब हन्तु॥

माता-पिता के चरणों की धूल मस्तक पर धारण करते हुए हे सरस्वती मां, आपकी वंदना करता हूं/करती हूं, हे दातारी मुझे बुद्धि की शक्ति दो। आपकी अमित और अनंत महिमा पूरे संसार में व्याप्त है। हे मां रामसागर के पापों का हरण अब आप ही कर सकती हैं।

॥चालीसा॥

जय श्री सकल बुद्धि बलरासी।जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी॥
जय जय जय वीणाकर धारी।करती सदा सुहंस सवारी॥

बुद्धि का बल रखने वाली अर्थात समस्त ज्ञान शक्ति को रखने वाली हे सरस्वती मां, आपकी जय हो। सब कुछ जानने वाली, कभी न मरने वाली, कभी न नष्ट होने वाली मां सरस्वती, आपकी जय हो। अपने हाथों में वीणा धारण करने वाली व हंस की सवारी करने वाली माता सरस्वती आपकी जय हो।

रूप चतुर्भुज धारी माता।सकल विश्व अन्दर विख्याता॥
जग में पाप बुद्धि जब होती।तब ही धर्म की फीकी ज्योति॥

हे मां आपका चार भुजाओं वाला रुप पूरे संसार में प्रसिद्ध है। जब-जब इस दुनिया में पाप बुद्धि अर्थात विनाशकारी और अपवित्र वैचारिक कृत्यों का चलन बढता है तो धर्म की ज्योति फीकी हो जाती है।

तब ही मातु का निज अवतारी।पाप हीन करती महतारी॥
वाल्मीकिजी थे हत्यारा।तव प्रसाद जानै संसारा॥

हे मां तब आप अवतार रुप धारण करती हैं व इस धरती को पाप मुक्त करती हैं। हे मां सरस्वती, जो वाल्मीकि जी हत्यारे हुआ करते थे, उनको आपसे जो प्रसाद मिला, उसे पूरा संसार जानता है।

रामचरित जो रचे बनाई।आदि कवि की पदवी पाई॥
कालिदास जो भये विख्याता।तेरी कृपा दृष्टि से माता॥

आपकी दया दृष्टि से रामायण की रचना कर उन्होंनें आदि कवि की पदवी प्राप्त की। हे मां आपकी कृपा दृष्टि से ही कालिदास जी प्रसिद्ध हुये।

तुलसी सूर आदि विद्वाना।भये और जो ज्ञानी नाना॥
तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा।केव कृपा आपकी अम्बा॥

तुलसीदास, सूरदास जैसे विद्वान और भी कितने ही ज्ञानी हुए हैं, उन्हें और किसी का सहारा नहीं था, ये सब केवल आपकी ही कृपा से विद्वान हुए मां।

करहु कृपा सोइ मातु भवानी।दुखित दीन निज दासहि जानी॥
पुत्र करहिं अपराध बहूता।तेहि न धरई चित माता॥

हे मां भवानी, उसी तरह मुझ जैसे दीन दुखी को अपना दास जानकर अपनी कृपा करो। हे मां, पुत्र तो बहुत से अपराध, बहुत सी गलतियां करते रहते हैं, आप उन्हें अपने चित में धारण न करें अर्थात मेरी गलतियों को क्षमा करें, उन्हें भुला दें।

राखु लाज जननि अब मेरी।विनय करउं भांति बहु तेरी॥
मैं अनाथ तेरी अवलंबा।कृपा करउ जय जय जगदंबा॥

हे मां मैं कई तरीके से आपकी प्रार्थना करता हूं, मेरी लाज रखना। मुझ अनाथ को सिर्फ आपका सहारा है। हे मां जगदंबा दया करना, आपकी जय हो, जय हो।

मधुकैटभ जो अति बलवाना।बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना॥
समर हजार पाँच में घोरा।फिर भी मुख उनसे नहीं मोरा॥

मधु कैटभ जैसे शक्तिशाली दैत्यों ने भगवान विष्णू से जब युद्ध करने की ठानी, तो पांच हजार साल तक युद्ध करने के बाद भी विष्णु भगवान उन्हें नहीं मार सके।

मातु सहाय कीन्ह तेहि काला।बुद्धि विपरीत भई खलहाला॥
तेहि ते मृत्यु भई खल केरी।पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥

हें मां तब आपने ही भगवान विष्णु की मदद की और राक्षसों की बुद्धि उलट दी। इस प्रकार उन राक्षसों का वध हुआ। हे मां मेरा मनोरथ भी पूरा करो।

चंड मुण्ड जो थे विख्याता।क्षण महु संहारे उन माता॥
रक्त बीज से समरथ पापी।सुरमुनि हदय धरा सब काँपी॥

चंड-मुंड जैसे विख्यात राक्षस का संहार भी आपने क्षण में कर दिया। रक्तबीज जैसे ताकतवर पापी जिनसे देवता, ऋषि-मुनि सहित पूरी पृथ्वी भय से कांपने लगी थी।

काटेउ सिर जिमि कदली खम्बा।बारबार बिन वउं जगदंबा॥
जगप्रसिद्ध जो शुंभनिशुंभा।क्षण में बाँधे ताहि तू अम्बा॥

हे मां आपने उस दुष्ट का शीष बड़ी ही आसानी से काट कर केले की तरह खा लिया। हे मां जगदंबा मैं बार-बार आपकी प्रार्थना करता हूं, आपको नमन करता हूं। हे मां, पूरे संसार में महापापी के रुप विख्यात शुंभ-निशुंभ नामक राक्षसों का भी आपने एक पल में संहार कर दिया।

भरतमातु बुद्धि फेरेऊ जाई।रामचन्द्र बनवास कराई॥
एहिविधि रावण वध तू कीन्हा।सुर नरमुनि सबको सुख दीन्हा॥

हे मां सरस्वती, आपने ही भरत की मां केकैयी की बुद्धि फेरकर भगवान श्री रामचंद्र को वनवास करवाया। इसी प्रकार रावण का वध भी आपने करवाकर देवताओं, मनुष्यों, ऋषि-मुनियों सबको सुख दिया।

को समरथ तव यश गुन गाना।निगम अनादि अनंत बखाना॥
विष्णु रुद्र जस कहिन मारी।जिनकी हो तुम रक्षाकारी॥

आपकी विजय गाथाएं तो अनादि काल से हैं, अनंत हैं इसलिए आपके यश का गुणगान करने का सामर्थ्य कोई नहीं रखता। जिनकी रक्षक बनकर आप खड़ी हों, उन्हें स्वयं भगवान विष्णु या फिर भगवान शिव भी नहीं मार सकते।

रक्त दन्तिका और शताक्षी।नाम अपार है दानव भक्षी॥
दुर्गम काज धरा पर कीन्हा।दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा॥

क्त दंतिका, शताक्षी, दानव भक्षी जैसे आपके अनेक नाम हैं। हे मां दुर्गम अर्थात मुश्किल से मुश्किल कार्यों को करने के कारण समस्त संसार ने आपको दुर्गा कहा।

दुर्ग आदि हरनी तू माता।कृपा करहु जब जब सुखदाता॥
नृप कोपित को मारन चाहे।कानन में घेरे मृग नाहे॥

हे मां आप कष्टों का हरण करने वाली हैं, आप जब भी कृपा करती हैं, सुख की प्राप्ती होती है, अर्थात सुख देती हैं। जब कोई राजा क्रोधित होकर मारना चाहता हो, या फिर जंगल में खूंखार जानवरों से घिरे हों

सागर मध्य पोत के भंजे।अति तूफान नहिं कोऊ संगे॥
भूत प्रेत बाधा या दुःख में।हो दरिद्र अथवा संकट में॥

या फिर समुद्र के बीच जब साथ कोई न हो और तूफान से घिर जाएं, भूत प्रेत सताते हों या फिर गरीबी अथवा किसी भी प्रकार के कष्ट सताते हों

नाम जपे मंगल सब होई।संशय इसमें करई न कोई॥
पुत्रहीन जो आतुर भाई।सबै छांड़ि पूजें एहि भाई॥

करै पाठ नित यह चालीसा।होय पुत्र सुन्दर गुण ईशा॥
धूपादिक नैवेद्य चढ़ावै।संकट रहित अवश्य हो जावै॥

हे मां आपका नाप जपते ही सब कुछ ठीक हो जाता है इसमें कोई संदेह नहीं है अर्थात इसमें कोई शक नहीं है कि आपका नाम जपने से बड़े से बड़ा संकट भी टल जाता है, दूर हो जाता है। जो संतानहीन हैं, वे और सब को छोड़कर आप माता की पूजा करें और हर रोज इस चालीसा का पाठ करें, तो उन्हें गुणवान व सुंदर संतान की प्राप्ति होगी। साथ ही माता पर धूप आदि नैवेद्य चढ़ाने से सारे संकट दूर हो जाते हैं।

भक्ति मातु की करैं हमेशा। निकट न आवै ताहि कलेशा॥
बंदी पाठ करें सत बारा। बंदी पाश दूर हो सारा॥

रामसागर बाँधि हेतु भवानी।कीजै कृपा दास निज जानी॥

जो भी माता की भक्ति करता है, कष्ट उसके पास नहीं फटकते अर्थात किसी प्रकार का दुख उनके करीब नहीं आता। जो भी सौ बार बंदी पाठ करता है, उसके बंदी पाश दूर हो जाते हैं। हे माता भवानी सदा अपना दास समझकर, मुझ पर कृपा करें व इस भवसागर से मुक्ति दें।

॥दोहा॥

मातु सूर्य कान्ति तव, अन्धकार मम रूप।
डूबन से रक्षा करहु परूँ न मैं भव कूप॥
बलबुद्धि विद्या देहु मोहि, सुनहु सरस्वती मातु।
राम सागर अधम को आश्रय तू ही देदातु॥

हे मां आपकी दमक सूर्य के समान है, तो मेरा रूप अंधकार जैसा है। मुझे भवसागर रुपी कुंए में डूबने से बचाओ। हे मां सरस्वती मुझे बल, बुद्धि और विद्या का दान दीजिये। हे मां इस पापी रामसागर को अपना आश्रय देकर पवित्र करें।

||इति श्री सरस्वती चालीसा समाप्त || 

सरस्वती चालीसा पढ़ने के लाभ || सरस्वती चालीसा पढ़ने के फायदे || Benefits of reading Saraswati Chalisa

  • माँ सरस्वती ज्ञान और कला की देवी है, इसलिए सरस्वती चालीसा का पाठ करने से मनुष्य को ब्रह्मा ज्ञान की प्राप्ति होती है। इसके द्वारा व्यक्ति में ज्ञान की ऊर्जा बढ़ती है और वह सम्पूर्णता की ओर अग्रसर होता है।
  • सरस्वती चालीसा (Saraswati Chalisa) का पाठ करने से मनुष्य बुद्धिमान बनता है। इसके द्वारा व्यक्ति के मन में सुचारू समझ, संयम, निर्णय की शक्ति विकसित होती है। वह समस्याओं का समाधान करने में सक्षम बनता है और जीवन में सफलता की प्राप्ति करता है।
  • किसी भी प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले माँ सरस्वती का ध्यान जरूर करना चाहिए और सरस्वती चालीसा (Saraswati Chalisa) का पाठ करके माँ सरस्वती की पूजा करनी चाहिए। इससे विद्यार्थी या प्रतिभागी को बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है और वह अच्छे परिणाम के साथ प्रतियोगिता में सफलता प्राप्त करता है।
  • सरस्वती चालीसा (Saraswati Chalisa) का पाठ करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। इसके द्वारा व्यक्ति के जीवन में आनंद और समृद्धि की वृद्धि होती है। धन, सुख, सम्पत्ति, और वैभव में वृद्धि होती है और व्यक्ति अपने जीवन की पूर्णता का आनंद उठा सकता है।
  • सरस्वती चालीसा (Saraswati Chalisa) की कृपा से सिद्धि-बुद्धि, धन-बल और ज्ञान-विवेक की प्राप्ति होती है। इसके पाठ से व्यक्ति में निरंतर उन्नति होती है और वह सफलता के दरवाजे खोलता है। जीवन में विजय प्राप्त करने के लिए सरस्वती चालीसा का प्रतिदिन पाठ करना चाहिए।
  • सरस्वती चालीसा (Saraswati Chalisa) का पाठ करने से एकाग्रता बढ़ती है। इसके द्वारा व्यक्ति में मानसिक शांति, संयम, और एकाग्रता की प्राप्ति होती है। इससे व्यक्ति अपने जीवन के कार्यों में पूर्णता के साथ समर्पित होता है और सभी चुनौतियों को पार करने की क्षमता प्राप्त करता है।

Conclusion

सरस्वती चालीसा (Saraswati Chalisa) एक प्रमुख पूजा पाठ है जो हमें मां सरस्वती की कृपा, आशीर्वाद, और मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह चालीसा हमें ज्ञान, बुद्धि, और कला की देवी के संपर्क में लाता है और हमारे जीवन में समृद्धि और सफलता के मार्ग को प्रकाशित करता है।

सरस्वती चालीसा (Saraswati Chalisa) के पाठ से हमें आंतरिक शांति, एकाग्रता, और संयम की प्राप्ति होती है। हम अपने मन को शुद्ध करते हैं और अपनी सोच और क्रियाएं संतुलित करते हैं। इसके पाठ से हमें ज्ञान, बुद्धि, और कला में वृद्धि होती है और हम अपने कार्यों में पूर्णता और उत्कृष्टता के साथ समर्पित होते हैं।

सरस्वती चालीसा (Saraswati Chalisa) का प्रतिदिनी पाठ करने से हमें आदर्श जीवन के लिए मार्गदर्शन मिलता है। हम ज्ञान, कला, और संगीत के क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन के सभी पहलुओं में उच्चतम स्तर की प्राप्ति कर सकते हैं। सरस्वती चालीसा हमें संगठित और सक्रिय जीवन जीने की प्रेरणा देता है और हमें मां सरस्वती की कृपा और आशीर्वाद से आनंदमय और समृद्ध जीवन की प्राप्ति होती है।

आइए, हम सभी मिलकर सरस्वती चालीसा (Saraswati Chalisa) के माध्यम से अपनी अन्तरंग शक्तियों को जागृत करें, मां सरस्वती के संपर्क में रहें और उनकी कृपा से सभी क्षेत्रों में उन्नति और सफलता का अनुभव करें। इस विशेष पूजा पाठ के माध्यम से हम अपने आप को आदर्श और समृद्ध जीवन के दिशानिर्देश के रूप में संरक्षित करें।

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